ज़िंदगी…

My Hindi Two-liners about ‘Life’…

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कभी इसके, कभी उसके इशारों पर चलती,
ये ज़िंदगी जुए का दाँव हो जैसे कोई…

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ज़िंदगी के कैन्वस पर तख़य्युल (Imagination) का चेहरा उकेर कर देखो,
तजुर्बे की स्याही का क़माल ख़ुद-ब-ख़ुद दिख जाएगा…

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कुछ क़िस्से हम ज़िंदगी को सुनाने बैठे थे,
ये एक ज़िंदगी हमारी पूरी दास्तान लिए बैठी थी…

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अच्छा हुआ ख़ैर ये भी के कुछ और ना किया हमने,
बस इश्क़ किया और ज़िंदगी को समझ लिया हमने…

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शुक्र है ज़िंदगी ग़म ही देती है…
कभी आईना थमा दे, तो अपने संस्करणों से भी मिल लेना…

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मौत के गवाह हुए सारे यहाँ,
ज़िंदगी के हथकंडे कोई जानता नहीं…

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मैं जब खुश हो जाऊँ तो नाराज़ होती है ज़िंदगी,
मैं अब नाराज़ हूँ तो बाज़ क्यों नहीं आती?

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लिख कर के ज़िंदगी बार-बार बेहिसाब रोया हूँ,
भरा हुआ था होंठों तक, चुप्पी टूटने के बाद रोया हूँ…

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#रshmi

©TheRashmiMishra.com

To Be Continued….

Images Courtesy: Photo Library from WordPress

 

10 Replies to “ज़िंदगी…”

  1. कभी इसके, कभी उसके इशारों पर चलती,
    ये ज़िंदगी जुए का दाँव हो जैसे कोई…
    क्या खूब लिखा है।बेहतरीन पंक्तियाँ।

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