प्यार के साइड-इफेक्ट्स…

प्यार के साइड-इफेक्ट्स मत बताना कभी किसी को, बताना तो बस ये कि प्यार कितना ख़ूबसूरत एहसास है... क्यूंकि हर किसी पर प्यार के साइड-इफेक्ट्स नहीं होते ये बस उन लोगों पर होते हैं जिनका दिल प्यार से लबालब भरा होता है, और एक दिन टूट जाता है, हो जाता है ख़ाली.... प्यार से नहीं, …

प्यार का घर…

पंख लगा कर उड़ आऊँ क्या मैं पास तुम्हारे? ज़मीन पर अब तुम दिखते नहीं हो कहीं किसी आसमान में छुप गए हो शायद वो अकेला आसमान बादलों की रज़ाई ओढ़ सोया हो, जहाँ कोई आता-जाता ना हो, जहाँ से ज़मीं भी नज़र ना आती हो मुट्ठी भर बादलों की आवाजाही हो, एक अदद चाँद …

दर्द…

कोई मोल ना रहा उनके दर्द का, यूँ के वो रिश्तेदारों से अपना दर्द कहते थे... दर्द तो सहते थे मग़र, उन्हें जाने क्यूँ वो अपना हमदर्द कहते थे... हमदर्द कभी दिल नहीं दुखाते, उनके मग़र कुछ अलग थे... ये दिल टटोलते भी थे, दुखाते भी थे और तोड़ते भी थे सुनते भी थे बड़ी …

एक उमंग…

एक रात काली, बहुत काली थी फिर भी एक सपने की शमा जगमगाती रही... अंधेरे में कहीं खो गया वो जुगनू चलते-चलते, एक लौ मग़र अंदर उसके झिलमिलाती रही... एक ओर समंदर का तूफ़ान बेचैन था, एक ओर मिट्टी की प्यास उफ़नती रही... उजड़ा हुआ एक आसमाँ सहमा पड़ा था, एक बंजर ज़मीं फ़र्ज़ निभाती …

ज़िंदगी…

My Hindi Two-liners about 'Life'... कभी इसके, कभी उसके इशारों पर चलती, ये ज़िंदगी जुए का दाँव हो जैसे कोई...   ज़िंदगी के कैन्वस पर तख़य्युल (Imagination) का चेहरा उकेर कर देखो, तजुर्बे की स्याही का क़माल ख़ुद-ब-ख़ुद दिख जाएगा...               कुछ क़िस्से हम ज़िंदगी को सुनाने बैठे थे, …

घर…

हम अकेलेपन के अँधेरे में खो रहे थे, ये दुनिया कहती थी हम घर में सो रहे थे... दर्द भी छुपाते थे (और) मरहम भी लगाते थे, हम दरअसल दीवारों में घर ढ़ो रहे थे... कुछ अरमान भी थे ख़ैर यूं तो, वो मग़र झूमर पर झूल रहे थे... एक कहानी बन गई दरवाज़ों के …