एक उमंग…

एक रात काली, बहुत काली थी फिर भी एक सपने की शमा जगमगाती रही... अंधेरे में कहीं खो गया वो जुगनू चलते-चलते, एक लौ मग़र अंदर उसके झिलमिलाती रही... एक ओर समंदर का तूफ़ान बेचैन था, एक ओर मिट्टी की प्यास उफ़नती रही... उजड़ा हुआ एक आसमाँ सहमा पड़ा था, एक बंजर ज़मीं फ़र्ज़ निभाती …

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घर…

हम अकेलेपन के अँधेरे में खो रहे थे, ये दुनिया कहती थी हम घर में सो रहे थे... दर्द भी छुपाते थे (और) मरहम भी लगाते थे, हम दरअसल दीवारों में घर ढ़ो रहे थे... कुछ अरमान भी थे ख़ैर यूं तो, वो मग़र झूमर पर झूल रहे थे... एक कहानी बन गई दरवाज़ों के …

यादें तेरी साथ रहती हैं…

तुमसे मुझे भरोसा मिला, मुझसे मिला मुझे डर... तुमने जीना सीखा दिया, खुदसे सीखा मैनें एैब हर... अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं, मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं... जाने क्या क्या तुमने सीखा दिया, मुझे गुलज़ार बना दिया.. बिखरे सारे जीवन को, एक मक़ाम दिला दिया... ख़ुशबू तेरी …

कहो प्यार कैसा दिखता है?

कहो प्यार कैसा दिखता है? तुम सा ! मुझ सा ! हमसे भी हसीन दिखता है? एक दुनिया है मेरी बसाई हुई तुम्हारे आस-पास, शायद उस जैसा दिखता है... सपने जैसा है, बेतरतीब दिखता है, हो ना हो जादू है उसमें, जाग जाऊँ तो नहीं दिखता है... कहो प्यार कैसा दिखता है? ... शाम सा! …

जीवन…

थोड़ी मुस्कुराहटें, थोड़े आंसू साथ रखना... थोड़ी खुशियां, ग़म भी बाँट लेना... क्या जाने ज़िन्दगी में कब कौन मुकर जाए, तुम्हें अकेला छोड़ जाए... तब ये मुस्कुराहटें खुशियां देती हैं और आंसू ग़मों से समझौता करते हैं ... जीवन बड़ा उसूलों वाला होता है, जितना लेता है उतना ही लौटा देता है... हम भी तो …

माँ!

तूने कितनें कष्ट सहे, तब जा कर हम बड़े हुए... माँ! क्या तुम ऊपर वाले से कभी मिलकर आई हो? इतनी शक्ति कहाँ से लाई हो? सब सह लेती हो तुम और ख़ामोश रह लेती हो तुम। मैं कभी तुझ सी ना हो पाऊँगी, दिल में दर्द रख़ कर कभी ना मुस्कुरा पाऊँगी... तुझको कितना …

रोल तुम्हारा…

इस ज़र्द सूरत से मत नापना मेरे दिल की गहराई को, दरिया बहता है ग़म का, तुम डूब जाओगे... इन आँखों के स्याह घेरों से मत तौलना मेरे अरमानों के विज़न (vision) को, बड़ा है, तुम्हारे तराज़ू में नहीं समाएगा... इस गेहुँआ रंग के मानिंद मत देखना मेरे फ़्यूचर (future) को, दूर है शायद, तुम्हें …

मजबूरी को नियति का नाम ना दे…

मजबूरी को नियति का नाम ना दे, अपनेआप को बेचारगी का फ़रमान ना दे... क़िस्मत में क्या है क्या नहीं, इसका फैसला क़िस्मत के हाथ ना दे... ख़ुद बढ़कर लिख अपना अफ़साना तू, कह दे क़िस्मत से आकर अपना इनाम ले !! माना हाथ बड़े हैं समय के, मग़र समय के हाथों में अपना हाथ …

औक़ात…

कपड़ा नहीं तो ना सही, रोटी नहीं तो कोई बात नहीं... मग़र सोचो नहीं के उनकी कोई औक़ात नहीं... ये देखो ज़रा औक़ात अपनी, कर लो तुलना उनसे अपनी.. दिल तो बड़ा उन्हीं का है जी, कारण कष्ट है जो उन्होंने सहा वही.. घर हैं मग़र चैन की नींद नहीं नसीब तुम्हें, आसमान से सूकून …

इश्क़ किया नहीं यूँ ही मैंने…

चाहा था जिसे अपने लिये, जो हमने गुज़ारा था, लम्हा मेरा, हर वो तुम्हारा था... इश्क़ किया नही यूँ ही मैंने, हाल-ए-दिल मेहरबान भी था... तू फ़साना मोहब्बत का, तू तराना धड़कन का... तू नूर है, मैं शमा सी जल जाऊँ... तू स्याही पिया, मैं रंग- रंग जाऊँ... तू चँदा, तुझसे रोशन घर रात का... …