एक उमंग…

एक रात काली, बहुत काली थी फिर भी
एक सपने की शमा जगमगाती रही…
अंधेरे में कहीं खो गया वो जुगनू चलते-चलते,
एक लौ मग़र अंदर उसके झिलमिलाती रही…

एक ओर समंदर का तूफ़ान बेचैन था,
एक ओर मिट्टी की प्यास उफ़नती रही…
उजड़ा हुआ एक आसमाँ सहमा पड़ा था,
एक बंजर ज़मीं फ़र्ज़ निभाती रही…

afterglow art backlit birds
Courtesy: Photo library from WordPress

एक दूर कहीं से आवाज़ सुनता था,
एक नदी पास ही शांत बहती रही…
पिंजरों का एक ढ़ेर हुजूम लगाए खड़ा था,
एक उमंग की परवाज़ मचलती रही…

एक जोगी मंज़िल से ठगा बैठा था,
एक राह उस पर हँसती रही…
निडर हुआ एक हौसला चल पड़ा था,
एक ज़िंदगी बीच में कहीं फँसी रही…

#रshmi

©therashmimishra.com

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घर…

हम अकेलेपन के अँधेरे में खो रहे थे,
ये दुनिया कहती थी
हम घर में सो रहे थे…

दर्द भी छुपाते थे (और)
मरहम भी लगाते थे,
हम दरअसल दीवारों में घर ढ़ो रहे थे…

कुछ अरमान भी थे ख़ैर यूं तो,
वो मग़र झूमर पर झूल रहे थे…
एक कहानी बन गई दरवाज़ों के पीछे,
आलमारियों को दीमक़ चख रहे थे…

बैठा था वो पुराना घर भी
दफ़्न किये, कई राज़
जो उसे बेहद तंग कर रहे थे…

#रshmi

©TheRashmiMishra.com

 

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यादें तेरी साथ रहती हैं…

तुमसे मुझे भरोसा मिला,
मुझसे मिला मुझे डर…
तुमने जीना सीखा दिया,
खुदसे सीखा मैनें एैब हर…
अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं…

जाने क्या क्या तुमने सीखा दिया,

मुझे गुलज़ार बना दिया..
बिखरे सारे जीवन को,
एक मक़ाम दिला दिया…
ख़ुशबू तेरी सब तरफ़,
मुझे महसूस करना सीखा दिया…
अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं।

हर पल क़रीब रोशनी थी,
जब तेरी मेरी दोस्ती थी…

टूटे जब बिखर बिखर कर,
तुमनें गले लगा लिया…
प्यार तुम्हारा मेरे जीनें का ज़रिया था…

अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं।vintage-photo-memories-old.jpg

विश्वास जो तुम्हें मुझ पर था,
मुझे उतना कभी ना था..

देखकर मुझे कहते रहते हो,
तुम बडी ‘डेटर्मिन्ड’ हो…
मैंने अब यकीन माना है,
जब तुम दिल से जाते नहीं हो..
अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं।

मासूम एक बच्चे सा ये रिश्ता,
जिसमें कोई दिखावा नहीं है…

क़िताबों सा ख़ामोश तुम्हारा चेहरा,
अरे! कितना सच्चा है…
लोगों में अाज भी,
तेरे मेरे प्यार का चर्चा है…
अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं।

तुमनें क्या क्या नहीं दिया,
मुझसे मुुझे मिलवा दिया…

देकर अपना वक्त मुझे,
तुमनें मुुझे अपना लिया…
अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं।

शुक्रिया उस मौके का,
जिसने मुझसे तुझे लिखवा दिया…

देखकर तुमको मुझे एक ‘अल्फाज़’ मिला,
वो तुम्हारा ‘नाम’ था..
और किस पर लिखते,
वजह तो बस यही तेरा नाम था..
अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं,
मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं।

#रshmi

 

Originally written in 2015.

कहो प्यार कैसा दिखता है?

कहो प्यार कैसा दिखता है?
तुम सा ! मुझ सा !
हमसे भी हसीन दिखता है?
एक दुनिया है मेरी बसाई हुई
तुम्हारे आस-पास,
शायद उस जैसा दिखता है…
सपने जैसा है,
बेतरतीब दिखता है,
हो ना हो जादू है उसमें,
जाग जाऊँ तो नहीं दिखता है…
कहो प्यार कैसा दिखता है?

शाम सा! रात सा!
भोर के धानी आँचल सा दिखता है?
एक सूरज हर रोज़
चमकता है ना,
आँगन में,
शायद उस जैसा दिखता है…
तितली जैसा है,
अपने रंगों पर इतरता है…
उस बारिश सा है जो बरसी नहीं,
या उस बूँद सा है जो
पानी से उठकर उसी में मिल गई?
सागरिका सा मौजी दिखता है…
कहो प्यार कैसा दिखता है?

उस पहली ज़रूरत सा,
जो कभी महसूस ही ना हुई!
या उस दबी हसरत सा,
जो कभी पूरी ना हुई!
उस गुनाह सा है,
जो कभी क़ुबूल ना हुआ!
शायद उस माफ़ी सा है,
जो कभी बख़्शी ना गई…
ये कितना अजीब है,
मुझे ज़रा पागल लगता है…
सब सा होकर भी,
सब जैसा नहीं दिखता है…
कहो प्यार कैसा दिखता है?

#रshmi

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जीवन…

थोड़ी मुस्कुराहटें, थोड़े आंसू साथ रखना…
थोड़ी खुशियां, ग़म भी बाँट लेना…
क्या जाने ज़िन्दगी में कब कौन मुकर जाए,
तुम्हें अकेला छोड़ जाए…
तब ये मुस्कुराहटें खुशियां देती हैं और
आंसू ग़मों से समझौता करते हैं …

जीवन बड़ा उसूलों वाला होता है,
जितना लेता है उतना ही लौटा देता है…
हम भी तो उसे सताते हैं,
उसे हमेशा थोंप कर देना चाहते हैं…
वो भी हम पर सब कुछ फिर थोंप देता है…
सच्चा रिश्ता अपने साथ इक यही निभाता है,
बाक़ी तो मतलब का सब रह जाता है….
कोई किसी के लिए न आता, न जाता है…
यही तो जीवन होता है,
ना किसी का कम ना ज़्यादा होता है…

ज़िन्दगी से बड़ा गुरु कोई कहाँ पाता है,
यही संघर्ष, यही ताल-मेल सिखाता है…
जनाब! बड़ा कठिन इसका हर इम्तिहान कहलाता है…
कैसे-कैसे रंग दिखाता है,
तभी तो हर क़दम मज़बूत हो पाता है…
इस बात का भी ख़्याल रखता है,
वो हर हाल में हमें मुस्कुराते हुए रखता है…
थोड़ा जज़्बा भी बचाकर रखना, जीना कुछ आसान होता है…
क्योंकि हर इम्तिहान का एक आखिरी पड़ाव होता है,
सब कर्मों का लेखा-जोखा इसके पास होता है…
ये ही तो जीवन होता है,
ये ना किसी का कम ना ज़्यादा होता है…

#रshmi

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माँ!

तूने कितनें कष्ट सहे, तब जा कर हम बड़े हुए…
माँ!
क्या तुम ऊपर वाले से कभी मिलकर आई हो?
इतनी शक्ति कहाँ से लाई हो?
सब सह लेती हो तुम और ख़ामोश रह लेती हो तुम।
मैं कभी तुझ सी ना हो पाऊँगी,
दिल में दर्द रख़ कर कभी ना मुस्कुरा पाऊँगी…
तुझको कितना सताया सबने,
तूने हँसते हँसते सब टाल दिया…
कैसे तुम इतना हँस लेती हो?
कोई चिराग है जादुई तुम्हारे पास क्या, जिससे ये सब कर लेती हो?
कितना तुझे झकझोर दिया दुनिया ने,
तू कुछ नहीं बोली…
कितना बुरा कहा तुझसे,
तू सबको माफ़ करती चली गई…
इतना हुनर तुम कहाँ से लाई,
कैसे सबको प्यार कर पाई?
मुझे ये हुनर कभी नहीं आएगा,
शायद तुझ सा आदर्श जीवन ना हो पाएगा…
कभी सोचा तुझ सा जी लूँ तो एहसास तेरे दुखों का भी आ गया,
हिम्मत ना हुई फिर कभी दुआ में ये कहने की,
के काश! मैं तेरी परछाँईं सी भी हो जाती…
तुमको जाने उसने किस मिट्टी से बनाया है,
शायद फिर वो भी एक बार ही मुस्कुराया है…
पर तुमने तो उसको भी हराया है,
मानो ऊपर वाले से लड़ कर तुम शौक से दुनिया संग संघर्ष करने आई हो…

तुझको देख़कर हिम्मत मिलती है,

जीने की हर पल आस बँधती है..
मैं तेरी परछाँई ना सही पर इतना ज़रुर माँगती हूँ,
हर जनम में अपनी माँ बस मैं तुझे ही चाहती हूँ…
माना तुझ पर बहुत नाराज़ होती हूँ,
वजह-बेवजह तुझसे झगड़ लेती हूँ…
पर मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ..
हाँ माँ!
मैं तुझे बहुत प्यार करती हूँ।
#रshmi
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रोल तुम्हारा…

इस ज़र्द सूरत से मत नापना
मेरे दिल की गहराई को,
दरिया बहता है ग़म का, तुम डूब जाओगे…

इन आँखों के स्याह घेरों से मत तौलना
मेरे अरमानों के विज़न (vision) को,
बड़ा है, तुम्हारे तराज़ू में नहीं समाएगा…

इस गेहुँआ रंग के मानिंद मत देखना
मेरे फ़्यूचर (future) को,
दूर है शायद, तुम्हें धुँधला नज़र आएगा…

मेरे हाथों पर पड़े इन नीले निशानों का भी
कोई लेना-देना नहीं है मेरी कुव्वत (ability) से,
ग़लतफ़हमी मत पालना, ये बस कुछ इन्जैक्शनज़ का क़माल है…
कमज़ोर हो गए मत मानना
मेरे हाथों को,
बहुत चुभन है, तुम्हारा अहम डगमगाएगा…

कुछ दवाओं ने बिगाड़ा मुझे,
कुछ किया-धरा दुआओं का भी है…
पर
इस बेड़ौल होते जिस्म से मत भाँपना
मेरी सोच को,
बहुत संभावना है, तुम सोच में पड़ जाओगे…

बेकार की बातों में पड़ गई, ये दोष कुछ हमारा भी है…
पहले थी एक बेवकूफ़ सी लड़की, समझदार हो गई इसमें रोल तुम्हारा भी है…
पर
इस बढ़ती उम्र से मत आँकना
मेरे जोश को,
अब भी पागलपन है, तुम बचपन में लौट जाओगे…

इस उम्रदराज़ होती आवाज़ से मत जानना
मेरी खोती हुई कहानी को,
अब भी हौसला है के तुम ख़ामोश हो जाओगे…

ख़ैर उम्र तो तुम जानते ही होगे मेरी, उम्र तो बस बहाना है
दरअसल तुम्हें बताना है, के मिट्टी की गुड़िया जैसी भोली नहीं अब मैं,
अच्छा हुआ जो तुम आए और तुम गए भी..
अब ये सीधी सी लड़की लोगों को समझने लग गई,
इसमें योगदान तुम्हारा भी है…
मग़र
उस खोए हुए बीते कल से मत जानना
मेरे आज को,
सुलझ गया है, तुम उलझ जाओगे…

अच्छा हुआ जो तुम आए पर नहीं ठहरे…
मैं शरारती आज भी हूँ, पर अब शरारतें नहीं करती…
पगली हूँ आज भी, पर अब तुम्हें याद नहीं करती…
ये जो पढ़ रहे हो ना तुम, तुम्हें नज़राने नहीं करती….

यूँ तुम्हें चुपके से देख कर दिल बहलाने में मज़ा आता है मुझे,
शायद नहीं मिलता ये मज़ा भी, जो तुम्हारे साथ होती..
अच्छा हुआ जो तुम आए पर नहीं ठहरे….
वरना मेरी ये ज़िंदगी इतनी खुशमिज़ाज नहीं होती !!

#रshmi

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