Language is not the deciding factor, writing is.

Languages evolved during the time but human bodies evolved earlier than the languages. It was human who created a language to communicate and I believe this was the greatest creation ever. Peoples' languages are means to communicate their feelings to the ones who understand them. As languages were created to communicate, we are supposed to …

कवि …

वो सृजन कहाँ से आया, जिसने कवि बनाया? कविताएँ तो बन गईं स्वतः ही, परन्तु कवित्व किसने जाया? शब्दों की माला पिरोई, रचनाओं को किसने सजाया? मन के भावों को भाषा दी, कल्पनाओं का ताना बाना बनाया.. वो सृजन कहाँ से आया, जिसने कवि बनाया? शायद वह वैरागी था कोई, जिसने फ़कीरी को प्रेम बनाया... …

नाता…

एक अजीब सी कश्मकश मचलती है मुझमें, कोई पुरानी दिल्लगी रह गई होगी.. कभी किसी परिंदे से जुड़ जाती हूँ, कभी चींटी से, कभी तितली से तो कभी किसी गिलहरी से, यहीं किसी की मेज़बानी रह गई होगी.. मुझे तो रत्ती भर अंदाज़ा नहीं इस मीठी चुभन का, शायद किसी से कभी कोई मुलाक़ात बाकी …

ख़री बात…

देखिये मैं ख़री ख़री कहता हूँ, इसीलिये आपको अखरता हूँ.. बातें तो मैं वो भी कर लूँ, जिनसे आपमें घुलता-मिलता हूँ.. पर फिर मैं कैसे सदाकत की बात कहता रहूँ? ख़ैर जाने दीजिए इन बातों को अभी, कभी और करेंगे.. आज तो ये बता दूँ के मैं आपसे ज़रा संभल कर के रहता हूँ.. अपने …

कुछ नहीं था…

  आरज़ूएँ तो ढ़ेरों थीं, मग़र उनकी अदला- बदली में कुछ नहीं था... दौलत तो बेशुमार थी, मग़र उससे लेना-देना कुछ नहीं था.. ख़्वाब तो बहुत थे, मग़र उन ख़्वाबों में आने को ख़ास कुछ नहीं था.. अरमान तो बहुत थे, मग़र उनमें दम निकाल देने वाला कुछ नहीं था.. बेहतरीन थीं वो बातें, मग़र …

भ्रम..

किससे कहें के हमें कोई भ्रम नहीं, जिससे कहना है, वो भी तो भ्रम से कम नहीं.. इसकी भी कहीं कहानी शुरू हुई थी, एक वहमी सी जुगलबंदी मिली थी.. होड़ लगी दिखावे की, चेहरे नहीं मिले, मैनें मुखौटे देखे थे.. कहाँ गए वो मुखौटे ज़ालिम, जिन मुखौटों में चेहरे छिपे थे !! हर दरवाज़े …

तड़पती रही वो रात..

हमारी फ़िक्र से तुम नादाँ ना वाक़िफ़ रहे... तड़पती रही वो रात, हर रात हम सँभलते रहे ! हम तुम्हारे रहे, तुम पर ठहरे रहे... वो मामला कुछ और रहा जबके हम, दो जिस्मों की एक रूह रहे... मौजूद तो रही जान बदन में जानेमन, हम मग़र बेजान रहे... तड़पती रही वो रात, हर रात …

हुज़ूर-ए-आला..

बेअदब है इरादा जनाब का, मुड़-मुड़ कर देखते हैं हुज़ूर-ए-आला, उलझन है हमें... ये इश्क़ की साज़िश है के मोहब्बत का क़ायदा? हिचकोले खाती, डोलती, झूमती ये नदियाँ.. मेरी कश्ती में ना साहिल है, ना किनारा.. जाने कहाँ डूब जाए.. ये पानी की गहराई है के लहरों की अठखेलियाँ... हुज़ूर-ए-आला, उलझन है हमें... ये इश्क़ …

Cheers for your heart!

I usually come up with topics which originate from musings, not all though. But this word when I think about, I don't need to overthink. I cherish writing about it, I don't think that I have grasped the whole understanding of this expression but I sense this emotion. Probably I don't know what is 'Love' …

क़द..

क़द छोटा रह गया सपनों की उडानों से, पर जद्दो- जहद ज़ारी है… ज़िंदगी तू भी कब तक मुझ पर भारी है? चल देख़ें तेरा भी कुछ क़माल, आ करें दो-दो हाथ.. तूने बहुत की तैयारी है, आ भी जा अब फिर मेरी बारी है तुझसे उम्मीदें रखी, ये बडी मेरी नादानी है तूने भी …