बंद हो नज़र में तुम अब…

आँखें खाली-खाली हैंभरी-भरी हैं यादों से, अंधेरे हो रहे हैं रौशनलड़ते मेरे उजालों से... तुमको देखकर लगता हैदेखा नहीं कुछ सालों से, बंद हो नज़र में तुम अबजैसे बंद कोई दीवारों में... १. पूछे हैं राज़ सवाबों नेअपने कई गुनाहों से, हो रही है दुनिया पागलअपने ही जवाबों से, ढ़ूँढ़ती है जाने क्या कुछअपने सवालों …

मेरी हथेलियों पे वो चाँद चमकता है…

मेरी हथेलियों पे वो चाँद चमकता है,मेरी आँखों में एक ख़्वाब धड़कता है...कुछ था जो छिन गया है,वो छिन कर भी मुझमें चहकता है....सीने पर एक बोझ सा है,बोझ वो कैसा हर बार खटकता है...बात भी करे अब कौन मुझसे,मेरी ज़ुबाँ पे बस तेरा नाम अटकता है...ऐसे कौन आता और चला जाता है,मेरे ख़्याल में …