Mysterious learning…

Today morning, something unusual happened to me! I woke up with this random thought. I'd picture myself dying in a particular state, in my mind! I envisioned that the final day was standing eye-to-eye, in front of me and I was in a state of sheer happiness where my mind was empty (having nothing to recollect) …

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घर…

हम अकेलेपन के अँधेरे में खो रहे थे, ये दुनिया कहती थी हम घर में सो रहे थे... दर्द भी छुपाते थे (और) मरहम भी लगाते थे, हम दरअसल दीवारों में घर ढ़ो रहे थे... कुछ अरमान भी थे ख़ैर यूं तो, वो मग़र झूमर पर झूल रहे थे... एक कहानी बन गई दरवाज़ों के …

यादें तेरी साथ रहती हैं…

तुमसे मुझे भरोसा मिला, मुझसे मिला मुझे डर... तुमने जीना सीखा दिया, खुदसे सीखा मैनें एैब हर... अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं, मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं... जाने क्या क्या तुमने सीखा दिया, मुझे गुलज़ार बना दिया.. बिखरे सारे जीवन को, एक मक़ाम दिला दिया... ख़ुशबू तेरी …

रिश्ते …

एक वादा था हमनवाही का, जो टूट गया एक रिश्ता बेनाम सा, बाक़ी रहा...   दिखावे में रह गए कुछ रिश्ते ज़िन्दगी भर, सादगी से रह कर भी कितने बेज़ुबान रहे...   TO BE CONTINUED.......   #रshmi Photo courtesy: Photo library from WordPress    

Justice!

Why do we forget before accusing everyone that everyone includes us as well? Why do we forget that we weren't born as casts and religions but as humans? Every single act that takes place is occurring in the name(s) of religion(s), a hollow skull of ethos. If people won't think of conducting such misdeeds, they …