ज़िंदगी…

My Hindi Two-liners about 'Life'... कभी इसके, कभी उसके इशारों पर चलती, ये ज़िंदगी जुए का दाँव हो जैसे कोई...   ज़िंदगी के कैन्वस पर तख़य्युल (Imagination) का चेहरा उकेर कर देखो, तजुर्बे की स्याही का क़माल ख़ुद-ब-ख़ुद दिख जाएगा...               कुछ क़िस्से हम ज़िंदगी को सुनाने बैठे थे, …

घर…

हम अकेलेपन के अँधेरे में खो रहे थे, ये दुनिया कहती थी हम घर में सो रहे थे... दर्द भी छुपाते थे (और) मरहम भी लगाते थे, हम दरअसल दीवारों में घर ढ़ो रहे थे... कुछ अरमान भी थे ख़ैर यूं तो, वो मग़र झूमर पर झूल रहे थे... एक कहानी बन गई दरवाज़ों के …

यादें तेरी साथ रहती हैं…

तुमसे मुझे भरोसा मिला, मुझसे मिला मुझे डर... तुमने जीना सीखा दिया, खुदसे सीखा मैनें एैब हर... अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं, मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं... जाने क्या क्या तुमने सीखा दिया, मुझे गुलज़ार बना दिया.. बिखरे सारे जीवन को, एक मक़ाम दिला दिया... ख़ुशबू तेरी …

रिश्ते …

एक वादा था हमनवाही का, जो टूट गया एक रिश्ता बेनाम सा, बाक़ी रहा...   दिखावे में रह गए कुछ रिश्ते ज़िन्दगी भर, सादगी से रह कर भी कितने बेज़ुबान रहे...   TO BE CONTINUED.......   #रshmi Photo courtesy: Photo library from WordPress