बचपन की बात..

बचपन की हर बात ये बड्डपन में समझाता है, दिल तो बच्चा है हमारा.. कहाँ नुक्कड़ से मैं गोल गप्पे ले आता था, अब हाइजीन ने तौबा करवा दी.. आज भी दिल को बहुत अजीज़ है वो बचपन वाली ख़रीददारी, जब 1₹ में ले आते थे 'टॉफियां' ढेर सारी.. सब पल वो बचपन में थे, …

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बचपन

कितना बेफ़िक़्र ये बचपन होता है, कोई बंदिशें ना कोई खोट होता है.. होती हैं जो हमसे वो प्यारी सी खतायें, कैसे बड़ी जल्दी सब माफ़ होता है.. शायद सब को हमारी उन हरकतों से बस तभी प्यार होता है, माना बचपन में बड़ा होना एक ख्वाब होता है, पर लगता है सिर्फ बचपन में …

बेबस बेटी

कल देखा उसे गली के नुक्कड़ पर बनी अपनी कोटड़ी से बाहर बैठे हँसते हुए, किसी से बातें करते, शायद भाई था उसका। उतना खुलकर हँसना तो बेशक हमें भी नहीं आता जैसे उसकी हँसी ख़िलख़िला रही थी, सच ही तो कहते हैं ख़ुशियाँ खुले बाज़ारों से ज़्यादा इस खुले आसमान के नीचे मिलती हैं.. फ्लैट्स …

मैं हर वो औरत हूँ..

अपनें जज़्बातों को दबाए रखना पड़ता था, अपनी आवाज़ को बंद रख़ना पड़ता था.. मेरे मन की सुनने वाला कोई नहीं था, सबके मन का मग़र मुझे करना पड़ता था.. मुझे क्या चोट पहुँचाता गया इससे किसी को कोई सरोकार नहीं था, हर एक की चोट पर मरहम करना मग़र मेरा कर्तव्य बताया गया.. जब जब मैनें …

मर्ज़ियाँ …

मुझसे मोहब्बत की, फिर मुझे छोड गये.. क़ाफिर हो गया हो जैसे कोई, इबादत करते करते ! रास्ते में दिल बिछा दिया मैंने, ये सोचकर.. मुसाफिर लैटता होगा मेरा थक हार कर! मुद्दतों बाद आज ये तमन्ना हुई.. तुझे छू कर देखूँ, तेरा इश्क़ वही तो नहीं? ऐसी मर्ज़ियाँ मुझे ही चोर कहने लग़ती हैं, …