नई द्रौपदी…
उस दिन जब मैं रोई थी, पूरी रात नहीं सोई थी.. दर्द नहीं था ये किसी की जुदाई का, मैं तो दर्द देखकर 'नई द्रौपदी' का रोई थी... इस बार यह कौरवों की आखेट नहीं है.. यहां महाभारत का कोई रण-नाद नहीं है.. द्रौपदी इस बार तेज़ाब से जल रही है.. परन्तु यह 'नया महाभारत' …

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