दर्द…

कोई मोल ना रहा उनके दर्द का, यूँ के वो रिश्तेदारों से अपना दर्द कहते थे... दर्द तो सहते थे मग़र, उन्हें जाने क्यूँ वो अपना हमदर्द कहते थे... हमदर्द कभी दिल नहीं दुखाते, उनके मग़र कुछ अलग थे... ये दिल टटोलते भी थे, दुखाते भी थे और तोड़ते भी थे सुनते भी थे बड़ी …

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एक उमंग…

एक रात काली, बहुत काली थी फिर भी एक सपने की शमा जगमगाती रही... अंधेरे में कहीं खो गया वो जुगनू चलते-चलते, एक लौ मग़र अंदर उसके झिलमिलाती रही... एक ओर समंदर का तूफ़ान बेचैन था, एक ओर मिट्टी की प्यास उफ़नती रही... उजड़ा हुआ एक आसमाँ सहमा पड़ा था, एक बंजर ज़मीं फ़र्ज़ निभाती …

घर…

हम अकेलेपन के अँधेरे में खो रहे थे, ये दुनिया कहती थी हम घर में सो रहे थे... दर्द भी छुपाते थे (और) मरहम भी लगाते थे, हम दरअसल दीवारों में घर ढ़ो रहे थे... कुछ अरमान भी थे ख़ैर यूं तो, वो मग़र झूमर पर झूल रहे थे... एक कहानी बन गई दरवाज़ों के …

यादें तेरी साथ रहती हैं…

तुमसे मुझे भरोसा मिला, मुझसे मिला मुझे डर... तुमने जीना सीखा दिया, खुदसे सीखा मैनें एैब हर... अब तू क़रीब नहीं पर ये यादें तेरी साथ रहती हैं, मुझे तुझसे जुदा होने नहीं देती हैं... जाने क्या क्या तुमने सीखा दिया, मुझे गुलज़ार बना दिया.. बिखरे सारे जीवन को, एक मक़ाम दिला दिया... ख़ुशबू तेरी …

She..

She is a story, unsaid She is a poetry, unsung She is history, unread She is a scenery, unobserved She is glossary, unnoticed She is bravery, uncelebrated. She is a voice, unheard She is a feeling, undesired She is laughter, unappreciated She is beam, unilluminated. She is questionnaire, unsolved She is a dare, unchallenged She …