दर्द…

कोई मोल ना रहा उनके दर्द का, यूँ के वो रिश्तेदारों से अपना दर्द कहते थे... दर्द तो सहते थे मग़र, उन्हें जाने क्यूँ वो अपना हमदर्द कहते थे... हमदर्द कभी दिल नहीं दुखाते, उनके मग़र कुछ अलग थे... ये दिल टटोलते भी थे, दुखाते भी थे और तोड़ते भी थे सुनते भी थे बड़ी …

Advertisements