प्यार का घर…

पंख लगा कर उड़ आऊँ क्या मैं पास तुम्हारे? ज़मीन पर अब तुम दिखते नहीं हो कहीं किसी आसमान में छुप गए हो शायद वो अकेला आसमान बादलों की रज़ाई ओढ़ सोया हो, जहाँ कोई आता-जाता ना हो, जहाँ से ज़मीं भी नज़र ना आती हो मुट्ठी भर बादलों की आवाजाही हो, एक अदद चाँद …

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