एक रात काली, बहुत काली थी फिर भी एक सपने की शमा जगमगाती रही... अंधेरे में कहीं खो गया वो जुगनू चलते-चलते, एक लौ मग़र अंदर उसके झिलमिलाती रही... एक ओर समंदर का तूफ़ान बेचैन था, एक ओर मिट्टी की प्यास उफ़नती रही... उजड़ा हुआ एक आसमाँ सहमा पड़ा था, एक बंजर ज़मीं फ़र्ज़ निभाती …
ज़िंदगी…
My Hindi Two-liners about 'Life'... कभी इसके, कभी उसके इशारों पर चलती, ये ज़िंदगी जुए का दाँव हो जैसे कोई... ज़िंदगी के कैन्वस पर तख़य्युल (Imagination) का चेहरा उकेर कर देखो, तजुर्बे की स्याही का क़माल ख़ुद-ब-ख़ुद दिख जाएगा... कुछ क़िस्से हम ज़िंदगी को सुनाने बैठे थे, …

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