देश के दिल को इस क़दर खा रही, जैसे राजनीति दावत मना रही.. भाषाओं के भी धर्म बता रही, देखो राजनीति बँटवारे करवा रही.. आँखों पर कंबल ढ़के सो रही, कानों के पट बंद किये बोल रही, ये राजनीति अँधी - बहरी हो गई.. राष्ट्र का सौदा कर इसे आपसी समझौता बता रही, ये राजनीति …
बचपन की बात..
बचपन की हर बात ये बड्डपन में समझाता है, दिल तो बच्चा है हमारा.. कहाँ नुक्कड़ से मैं गोल गप्पे ले आता था, अब हाइजीन ने तौबा करवा दी.. आज भी दिल को बहुत अजीज़ है वो बचपन वाली ख़रीददारी, जब 1₹ में ले आते थे 'टॉफियां' ढेर सारी.. सब पल वो बचपन में थे, …

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