हम बौने ही अच्छे भईया…

हम नहीं कर पाएँगे दिखावा, ओ भईया! हम नहीं बन पाएँगे खजूर सी ऊँची छँईया... ले जाओ ये सामान अपना खजूर उगाने का, हम नहीं मचा पाएँगे ये बेबुनियादी हल्ला... लगता तो होगा गिरगिट सा तुम्हें हर बदन, मेरा भी, पर तुम्हें ही मुब़ारक ये नज़र का पतन, तेरा ही... चाहो तो ले आना संदेसा …

नई द्रौपदी…

उस दिन जब मैं रोई थी, पूरी रात नहीं सोई थी.. दर्द नहीं था ये किसी की जुदाई का, मैं तो दर्द देखकर 'नई द्रौपदी' का रोई थी... इस बार यह कौरवों की आखेट नहीं है.. यहां महाभारत का कोई रण-नाद नहीं है.. द्रौपदी इस बार तेज़ाब से जल रही है.. परन्तु यह 'नया महाभारत' …