इस ज़र्द सूरत से मत नापना मेरे दिल की गहराई को, दरिया बहता है ग़म का, तुम डूब जाओगे... इन आँखों के स्याह घेरों से मत तौलना मेरे अरमानों के विज़न (vision) को, बड़ा है, तुम्हारे तराज़ू में नहीं समाएगा... इस गेहुँआ रंग के मानिंद मत देखना मेरे फ़्यूचर (future) को, दूर है शायद, तुम्हें …
मजबूरी को नियति का नाम ना दे…
मजबूरी को नियति का नाम ना दे, अपनेआप को बेचारगी का फ़रमान ना दे... क़िस्मत में क्या है क्या नहीं, इसका फैसला क़िस्मत के हाथ ना दे... ख़ुद बढ़कर लिख अपना अफ़साना तू, कह दे क़िस्मत से आकर अपना इनाम ले !! माना हाथ बड़े हैं समय के, मग़र समय के हाथों में अपना हाथ …

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