मर्ज़ियाँ …

मुझसे मोहब्बत की, फिर मुझे छोड गये.. क़ाफिर हो गया हो जैसे कोई, इबादत करते करते ! रास्ते में दिल बिछा दिया मैंने, ये सोचकर.. मुसाफिर लैटता होगा मेरा थक हार कर! मुद्दतों बाद आज ये तमन्ना हुई.. तुझे छू कर देखूँ, तेरा इश्क़ वही तो नहीं? ऐसी मर्ज़ियाँ मुझे ही चोर कहने लग़ती हैं, …