बेअदब है इरादा जनाब का, मुड़-मुड़ कर देखते हैं हुज़ूर-ए-आला, उलझन है हमें... ये इश्क़ की साज़िश है के मोहब्बत का क़ायदा? हिचकोले खाती, डोलती, झूमती ये नदियाँ.. मेरी कश्ती में ना साहिल है, ना किनारा.. जाने कहाँ डूब जाए.. ये पानी की गहराई है के लहरों की अठखेलियाँ... हुज़ूर-ए-आला, उलझन है हमें... ये इश्क़ …
क़द..
क़द छोटा रह गया सपनों की उडानों से, पर जद्दो- जहद ज़ारी है… ज़िंदगी तू भी कब तक मुझ पर भारी है? चल देख़ें तेरा भी कुछ क़माल, आ करें दो-दो हाथ.. तूने बहुत की तैयारी है, आ भी जा अब फिर मेरी बारी है तुझसे उम्मीदें रखी, ये बडी मेरी नादानी है तूने भी …

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