देखिये मैं ख़री ख़री कहता हूँ, इसीलिये आपको अखरता हूँ.. बातें तो मैं वो भी कर लूँ, जिनसे आपमें घुलता-मिलता हूँ.. पर फिर मैं कैसे सदाकत की बात कहता रहूँ? ख़ैर जाने दीजिए इन बातों को अभी, कभी और करेंगे.. आज तो ये बता दूँ के मैं आपसे ज़रा संभल कर के रहता हूँ.. अपने …
कुछ नहीं था…
आरज़ूएँ तो ढ़ेरों थीं, मग़र उनकी अदला- बदली में कुछ नहीं था... दौलत तो बेशुमार थी, मग़र उससे लेना-देना कुछ नहीं था.. ख़्वाब तो बहुत थे, मग़र उन ख़्वाबों में आने को ख़ास कुछ नहीं था.. अरमान तो बहुत थे, मग़र उनमें दम निकाल देने वाला कुछ नहीं था.. बेहतरीन थीं वो बातें, मग़र …

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