तुमसे मिलूँगी….

मैं तुमसे कहीं फिर मिलूँगी... जाने कब और कहाँ मिलूँगी, याद करना मुझे जहाँ हो, शायद इंतज़ार में वहीं मिलूँगी... जा रही हूँ मैं जाने दो, मुझे यूँ प्यार से ना रोको... दीवाने हो ना जाना देखो, ज़िद्द को दिल की मना के रक्खो... वरना मैं तुमसे नहीं मिलूँगी!! कहते हो इश्क़ करते हो, ज़रा …

हम बौने ही अच्छे भईया…

हम नहीं कर पाएँगे दिखावा, ओ भईया! हम नहीं बन पाएँगे खजूर सी ऊँची छँईया... ले जाओ ये सामान अपना खजूर उगाने का, हम नहीं मचा पाएँगे ये बेबुनियादी हल्ला... लगता तो होगा गिरगिट सा तुम्हें हर बदन, मेरा भी, पर तुम्हें ही मुब़ारक ये नज़र का पतन, तेरा ही... चाहो तो ले आना संदेसा …