औक़ात…

कपड़ा नहीं तो ना सही, रोटी नहीं तो कोई बात नहीं... मग़र सोचो नहीं के उनकी कोई औक़ात नहीं... ये देखो ज़रा औक़ात अपनी, कर लो तुलना उनसे अपनी.. दिल तो बड़ा उन्हीं का है जी, कारण कष्ट है जो उन्होंने सहा वही.. घर हैं मग़र चैन की नींद नहीं नसीब तुम्हें, आसमान से सूकून …

इश्क़ किया नहीं यूँ ही मैंने…

चाहा था जिसे अपने लिये, जो हमने गुज़ारा था, लम्हा मेरा, हर वो तुम्हारा था... इश्क़ किया नही यूँ ही मैंने, हाल-ए-दिल मेहरबान भी था... तू फ़साना मोहब्बत का, तू तराना धड़कन का... तू नूर है, मैं शमा सी जल जाऊँ... तू स्याही पिया, मैं रंग- रंग जाऊँ... तू चँदा, तुझसे रोशन घर रात का... …