तुमसे मिलूँगी….

मैं तुमसे कहीं फिर मिलूँगी…
जाने कब और कहाँ मिलूँगी,
याद करना मुझे जहाँ हो,
शायद इंतज़ार में वहीं मिलूँगी…

जा रही हूँ मैं जाने दो,
मुझे यूँ प्यार से ना रोको…
दीवाने हो ना जाना देखो,
ज़िद्द को दिल की मना के रक्खो…
वरना मैं तुमसे नहीं मिलूँगी!!

कहते हो इश्क़ करते हो,
ज़रा संभल कर पैर रक्खो…
मस्ती में खो ना जाना देखो,
दिल को अभी और धड़कने दो….
मैं तुुुमसे यहीं फिर मिलूँगी…

प्यार है तो साबित करो,
दुआओं को आज़ाद रक्खो…
साँसों को थोड़ा और मचलने दो..
कश्ती को अपनी किनारे पे रक्खो…
फिर शायद मैं ऐतबार करूँगी !!

#रshmi

pexels-photo-260919.jpeg

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13 thoughts on “तुमसे मिलूँगी….

  1. Beautifully penned 🙂
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    Liked by 1 person

  2. ज़िद्द को दिल की मना के रक्खो …….

    साँसों को थोड़ा और मचलने दो..
    कश्ती को अपनी किनारे पे रक्खो…

    kitana virodhabhash hai in panktiyon men

    Like

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