तुमसे मिलूँगी….

मैं तुमसे कहीं फिर मिलूँगी…
जाने कब और कहाँ मिलूँगी,
याद करना मुझे जहाँ हो,
शायद इंतज़ार में वहीं मिलूँगी…

जा रही हूँ मैं जाने दो,
मुझे यूँ प्यार से ना रोको…
दीवाने हो ना जाना देखो,
ज़िद्द को दिल की मना के रक्खो…
वरना मैं तुमसे नहीं मिलूँगी!!

कहते हो इश्क़ करते हो,
ज़रा संभल कर पैर रक्खो…
मस्ती में खो ना जाना देखो,
दिल को अभी और धड़कने दो….
मैं तुुुमसे यहीं फिर मिलूँगी…

प्यार है तो साबित करो,
दुआओं को आज़ाद रक्खो…
साँसों को थोड़ा और मचलने दो..
कश्ती को अपनी किनारे पे रक्खो…
फिर शायद मैं ऐतबार करूँगी !!

#रshmi

pexels-photo-260919.jpeg
Courtesy: Photo library from WordPress
Advertisements

16 Replies to “तुमसे मिलूँगी….”

  1. ज़िद्द को दिल की मना के रक्खो …….

    साँसों को थोड़ा और मचलने दो..
    कश्ती को अपनी किनारे पे रक्खो…

    kitana virodhabhash hai in panktiyon men

    Like

  2. “.रहे ना रहे हम,महका करेंगे;बन कली बन के सब़ा बागे-ब़फा में…….”
    ना जाने क्या क्या याद आ रहा है आपको पढ़के।बहुत ज़ज्बाती हैं आपकी नज़्म के हर्फ।

    Liked by 1 person

    1. अगर मुझे पढ़ कर आपको कुछ भी याद नहीं आता, तो मुझे अपना लिखा बेवजह सा लगता… अच्छा लगा के आपकी ज़िंदगी से जुड़ पाए मेरे अल्फ़ाज़। बेहद शुक्रिया! 🙏

      Like

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s