मर्ज़ियाँ …

मुझसे मोहब्बत की, फिर मुझे छोड गये..
क़ाफिर हो गया हो जैसे कोई, इबादत करते करते !
रास्ते में दिल बिछा दिया मैंने, ये सोचकर..
मुसाफिर लैटता होगा मेरा थक हार कर!

मुद्दतों बाद आज ये तमन्ना हुई..
तुझे छू कर देखूँ, तेरा इश्क़ वही तो नहीं?
ऐसी मर्ज़ियाँ मुझे ही चोर कहने लग़ती हैं,
जब ख़ामोश़ी से मैं अपना ही चैन खो बैठती हूँ!

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My Click!

तुम्हारा मुझे क्या मालूम, अपने हाल पर जल रही हूँ मैं..
मेरी अपनी लगने वाली कहानियों का क़िरदार कोई और निकला !
कहीं और जाना था मुझे, जाने कहाँ आ पहुँची हूँ मैं..
अपनी राह चलते, तेरी राह आ पहुँची हूँ मैं !

देख़ लेना जब वक़्त मिले..
जैसी छोड गये थे आज तक वैसी ही हूँ मैं
कल का पता नहीं, मग़र आज को तुझ जैसी हूँ मैं!
क्यों किया कहो तुमने ऐसा, अपनी गलियों में भटका छोड़ा…
इस शिक़ायत का क्या अंजाम होगा, मालूम नहीं..
मग़र ग़ुस्ताख़ ये दिल कल भी था और ये कल भी होगा!

#रshmi

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